एक अकेला इंसान एआई टूल्स की मदद से सौ करोड़ रुपये की कंपनी बना सकता है।
डिमांड पहले, प्रोडक्ट उसके बादवैभव साफ कहते हैं कि वे ऐसी नई चीज़ नहीं बनाएँगे जिसकी डिमांड पहले से मौजूद न हो।
अस्सी फीसदी एआई, बीस फीसदी इंसानवैभव ह्यूमन लेयर रखते हैं ताकि कोई सॉफ्टवेयर इंजीनियर कल वही प्रोडक्ट बनाकर उन्हें कुचल न दे।
टूल नहीं, प्रोसेस सीखोउनके हिसाब से दस लाख लोग यह देखेंगे, पर टिककर पैसा वही दस लोग बनाएँगे जो बार-बार पिवट करते रहेंगे।
Executive SummaryAI
राज और वैभव इस दावे से शुरू करते हैं कि एक इंसान अकेले मिलियन डॉलर की कंपनी बना देगा, और सवाल यही है कि वह कैसे।
वैभव दो ताज़ा मिसालें देते हैं — एक ओपन-सोर्स फाउंडर जिसे सैम ऑल्टमैन ने अकेले हायर कर लिया, और मैथ्यू गैलेगर, जिसकी मेडवी 20,000 डॉलर से शुरू होकर पिछले साल 100 मिलियन डॉलर रेवेन्यू पर पहुँची।
उनका फ्रेमवर्क चार फिल्टर का है: डिमांड पहले से मौजूद हो, यूजर एक्विजिशन डिजिटल हो, प्राइस ऐसा हो कि लोग सोचें नहीं — भारत में 1,500 से 2,000 रुपये महीने का सब्सक्रिप्शन — और तीन-चार साल में 100 करोड़ रेवेन्यू का लक्ष्य हो।
पर्प्लेक्सिटी के मॉडल काउंसिल में तीन मॉडल आपस में बहस करके बिजनेस ब्लूप्रिंट देते हैं — सबकी सहमति स्पोकन इंग्लिश और इंटरव्यू कोच पर है, और जेमिनी कहता है कि 10,000 से 12,000 सब्सक्राइबर से यह आँकड़ा छुआ जा सकता है।
दोनों एआई डेटिंग कोच चुनते हैं, 1,500 रुपये महीने का एआई प्रो टियर और ह्यूमन मॉक डेट का ऐडऑन बनाते हैं, फिर हिग्सफील्ड, सीड डांस, वापी के वॉइस एजेंट और पेपरक्लिप जैसे टूल्स से ऐड, कॉल और पूरा ऑपरेशन लाइव चलाकर दिखाते हैं।