सत्ता के डर में विक्रांत तांत्रिक भैरवनाथ से कुर्सी पाता है, और श्राप कीमत वसूलने लगता है।
कुर्सी की कीमत मांगी जाती हैभैरवनात साफ कहता है कि वो कुर्सी दिला सकता है, लेकिन बदले में कुछ लेता है।
डर ही विक्रांत का असली चेहरा थागुस्से के पीछे कुर्सी और सत्ता खोने का डर छिपा था, और वही उसे तांत्रिक तक ले गया।
जीत के साथ श्राप शुरू हुआसिद्धि पूरी होने के बाद कॉकरोज पहले दीवार पर, फिर कैबिनेट मीटिंग में उसके मुँह से निकले।
Executive SummaryAI
मुंबई की बारिश वाली रात मंत्रालय के बाहर मीडिया जमा है और राज्य के नए मुख्यमंत्री विक्रांत देशमुक गाड़ी से उतरते ही गले में खुजली, जलन और कान के भीतर कुछ रेंगने जैसा महसूस करते हैं, फिर भी कैमरों के सामने मुस्कुराते रहते हैं।
तीन महिने पहले उसका राजनीतिक करियर खत्म होने वाला था — पार्टी हाई कमान टिकट देने के पक्ष में नहीं थी, कई वरिष्ठ नेताओं ने मोर्चा खोल दिया था, और फार्म हाउस में विस्की पीते हुए उसने गुस्से में गिलास टीवी पर दे मारा।
उसी रात पुराना दोस्त महाजन आकर एक रास्ता बताता है — भैरवनात नाम का तांत्रिक, जिसके पास मंत्री, सांसद और उद्योगपति जाते हैं, जो कुर्सी दिला सकता है लेकिन बदले में कीमत लेता है।
तीन दिन बाद रात के दो बजे जंगल के मंदिर के नीचे गुप्त कक्ष में भैरवनात उससे उसका सबसे बड़ा डर पूछता है, हिलते हुए मिट्टी के मटके का ढक्कन खोलता है और "राज सिध्धि पूर्ण हो" कहते हुए सिद्धि पूरी कर देता है।
सिद्धि के बाद विरोधी नेता फंसते और घायल होते चले गए, ऐतिहासिक जीत मिली, दीवार पर सैकड़ों कॉकरोज दिखे, और जीत के बाद पहली कैबिनेट मीटिंग में बोलते हुए उसके मुँह से एक छोटा काला कॉकरोज निकलकर टेबल पर गिर गया।