गीत की शुरुआत इस टेक से होती है कि जीना हो तो अपन के जैसे ही जीना, और गायक कहता है कि गाड़ी, बंगला, बैंक बैलेंस या टीवी-वीडियो न हों तो भी कोई बात नहीं।
वह कहता है कि इन चीज़ों की फ़िक्र क्यों करें, मस्त कलंदर की तरह जियो।
दूसरी आवाज़ जवाब देती है कि गाड़ी-बंगला और बैंक बैलेंस से दिन-रात रंगीन होते हैं, इनकी कुछ क़दर करो और यारो थोड़ा सुधर जाओ।
गायक खुद को अपनी मर्ज़ी का राजा बताता है और कहता है कि धंधा किया या नहीं, इसकी क्या फ़िक्र, कल किसने देखा है, हम तो आज में जीते हैं।
अंत में वह शेरों जैसे जिगर और हमेशा ऊँचे सिर की बात करते हुए फिर वही टेक दोहराता है।
Brief overview
गीत कहता है कि असली जीना बेफ़िक्र, मस्त कलंदर की तरह अपनी मर्ज़ी से जीना है।
दौलत के बिना भी खुश रहनागाड़ी, बंगला और बैंक बैलेंस न हों तो भी गायक कहता है "ना सही"।
आज में जीने का संदेशगीत पूछता है कि कल का क्या है, किसने देखा, हम तो आज में जीते हैं।
दूसरा पक्ष दौलत की क़दर माँगता हैजवाबी पंक्तियाँ कहती हैं कि बैंक बैलेंस से दिन-रात रंगीन होते हैं, इनकी क़दर करो।
Questions this recording answers
3 questions, each answered where it is said
गीत के अनुसार जीने का सही तरीका क्या है?
गीत बार-बार कहता है "जीना हो तो अपन के जैसे ही जीना"। गायक के मुताबिक़ गाड़ी, बंगला, बैंक बैलेंस या टीवी-वीडियो न हों तो भी ना सही, इनकी फ़िक्र क्यों करें, बस मस्त कलंदर की तरह जियो और अपनी मर्ज़ी के राजा बनकर रहो।
क्या गीत में दौलत के पक्ष में भी कोई बात कही गई है?
हाँ, जवाबी पंक्तियाँ कहती हैं कि गाड़ी-बंगला हो तो क्या बात है, बैंक बैलेंस से दिन-रात रंगीन होते हैं और टीवी-वीडियो का अपना मज़ा है। वे कहती हैं कि इनकी कुछ तो क़दर करो और यारो थोड़ा सुधर जाओ।
गायक भविष्य और हिम्मत के बारे में क्या कहता है?
गायक कहता है कि कल का क्या है, किसने देखा, हम तो आज में जीते हैं। उसके अनुसार जिनमें हिम्मत नहीं वही ऐसी बातें करते हैं, जबकि उसका जिगर शेरों जैसा है और उसका सिर सदा ऊँचा रहा है।